Sunday, 13 November 2011

भीड़ तंत्र

अभयानंदजी राज्य के ऐसे दूसरे डी. जी .पी है जिन्होंने भीड़ तंत्र के खतरें को महसूस  किया है .पहली बार डी एन गौतम ने बढ़ते भीड़ तंत्र को आतंकवाद से भी ज्यादा घातक माना था . अभयानंदजी  ने सोनपुर मेले में अपराध निरोध प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए बड़े ही मार्मिक अंदाज में किसी -किसी घटना के बाद लोगो के उग्र हो जाने और यहाँ तक कि पुलिस पर पथराव किये जाने का जिक्र किया और कहा कि ऐसी प्रवृति से अनुसन्धान में बाधा पहुच रही है . भीड़ तंत्र के खतरे पर कुछ साल पहले जब मैंने एक सेमिनार में विचार व्यक्त किये थे तब इसे काफी हल्के रूप में लिया गया था . बात -बात में सड़क जाम से कितनी पीड़ा होती है , यह वही महसूस  करता  है जो रास्ते पर सफ़र में होता है . कोई घटना हुई और लोग घेर लेते है थाने को . बिना अनुसन्धान के ही गिरफ्तारी का दबाब बनाया जाता है ,अगर यही प्रवृति  कायम रही तो वह दिन दूर नहीं जब एक भीड़ अदालतों को घेर लेगी और अनुकूल फैसले के लिए दबाब बनाएगी .

No comments:

Post a Comment