Sunday, 13 November 2011

भीड़ तंत्र

अभयानंदजी राज्य के ऐसे दूसरे डी. जी .पी है जिन्होंने भीड़ तंत्र के खतरें को महसूस  किया है .पहली बार डी एन गौतम ने बढ़ते भीड़ तंत्र को आतंकवाद से भी ज्यादा घातक माना था . अभयानंदजी  ने सोनपुर मेले में अपराध निरोध प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए बड़े ही मार्मिक अंदाज में किसी -किसी घटना के बाद लोगो के उग्र हो जाने और यहाँ तक कि पुलिस पर पथराव किये जाने का जिक्र किया और कहा कि ऐसी प्रवृति से अनुसन्धान में बाधा पहुच रही है . भीड़ तंत्र के खतरे पर कुछ साल पहले जब मैंने एक सेमिनार में विचार व्यक्त किये थे तब इसे काफी हल्के रूप में लिया गया था . बात -बात में सड़क जाम से कितनी पीड़ा होती है , यह वही महसूस  करता  है जो रास्ते पर सफ़र में होता है . कोई घटना हुई और लोग घेर लेते है थाने को . बिना अनुसन्धान के ही गिरफ्तारी का दबाब बनाया जाता है ,अगर यही प्रवृति  कायम रही तो वह दिन दूर नहीं जब एक भीड़ अदालतों को घेर लेगी और अनुकूल फैसले के लिए दबाब बनाएगी .

Saturday, 12 November 2011

बिहार का लोकायुक्त बिल

बिहार कैबिनेट से पारित लोकायुक्त बिल पर सवाल खड़े कर टीम  अन्ना खास कर अरविन्द केजरीवाल और किरण बेदी क्या यही साबित करना चाहते हैं कि सवा अरब की आबादी वाले इस देश में उनकी समझ ही आखरी समझ और अंतिम सत्य है ? क्या वे यह मान रहे हैं  कि देश ने उन्हें कुछ भी बोलने का अधिकार दे दिया है ? 
बिहार का लोकायुक्त बिल एक परफेक्ट बिल है . किसी को यह नहीं भुलाना चाहिए कि जिस पर आरोप लगाया जाता है , उसे भी अपना पक्ष रखने और बचाओ करने का पूरा अधिकार है . यही नैसर्गिक न्याय है . 
खासकर, ऐसे समय में जब शपथ लेकर भी लोग झूठी गवाहियाँ देने से भी परहेज नहीं करते , विशेष सतर्कता और सावधानियां जरुरी है . आरोप साबित होने पर दोषी को सजा अवश्य मिले पर अगर आरोप झूठे निकालें तो शिकायतकर्ता को भी सख्त  सजा दी जानी चाहिए वरना जिस तरह आरोपों की खेती होने लगी है और झूठे मुक़दमे भी होने लगे है, वह दिन दूर नहीं जब हर आदमी मुजरिम और हर घर जेल होगा. 
बिहार के लोकायुक्त बिल के लिए सी. एम. को बधाई .